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नकली मुस्कुराहटों के पीछे की असली वजहों का विश्लेषण…..

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नई दिल्ली: रविवार दोपहर से पूरा देश सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की आत्महत्या पर चर्चा कर रहा है. दफ्तरों, कैंटीनों और मोहल्लों से लेकर हर परिवार में इसी पर बात हो रही है कि आखिर सुशांत सिंह राजपूत ने ऐसा क्यों किया. आज हम इसी का एक विश्लेषण करेंगे और आपको बताएंगे कि कैसे एक अभिनेता की आत्महत्या ने समाज के चेहरे से वो सारे मास्क हटा दिए हैं जिनके पीछे रिश्तों, प्यार और दोस्ती का खोखलापन छिपा होता है. एक नकारात्मक विचार और एक वायरस में ये फर्क होता है कि वायरस आपके शरीर को नुकसान पहुंचाता है और नकारात्मक विचार आपके मन को चोट पहुंचाते हैं. वायरस का इलाज सोशल डिस्टेंसिंग है जबकि डिप्रेशन का कारण भी सोशल डिस्टेंसिंग ही है.

सुशांत ने आखिर ऐसा क्यों किया? ऐसी कौन सी बात थी जिसने सुशांत के मन को इतना अशांत कर दिया? क्यों सुशांत अंदर ही अंदर घुट रहे थे और क्यों एक सफल अभिनेता जिसे पैसों की कोई तंगी नहीं थी, जो शारीरिक रूप से स्वस्थ था, जिसके पास सपनों की पूरी लिस्ट थी आखिर उसने अपने जीवन को समाप्त क्यों किया?

लेकिन सबसे पहले आपको सुशांत सिंह राजपूत के बारे में कुछ बातें जाननी जरूरी हैं. फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कम ही कलाकार हैं जिन्होंने अपने संघर्ष और अपने टैलेंट के दम पर सुशांत सिंह राजपूत जैसी सफलता पाई.

सिर्फ 7 वर्ष में ही वो कम से कम 8 बड़ी और चर्चित फिल्मों में लीड हीरो के तौर पर दिखाई दिए. एक 34 वर्ष के युवा के लिए ये बहुत ही बड़ी सफलता थी. जिसने फिल्मों के लिए इंजीनियरिंग जैसा करियर छोड़ दिया था. स्कूल के समय से ही वो बहुत टैलेंटेड यानी प्रतिभावान छात्र थे और एस्ट्रो फिजिक्स (Astro Physics) उनका प्रिय विषय था. फिजिक्स में सुशांत National Olympiad Winner भी रहे थ. उन्होंने 11 इंजीनियरिंग एग्जाम्स क्लियर किए थे. वर्ष 2003 में दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के एंट्रेंस एग्जाम में उनकी ऑल इंडिया सातवीं रैंक आई थी. बिहार के पटना से दिल्ली आकर उन्होंने इसी कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. यही नहीं उन्हें अमेरिका की कैलिफोर्निया की प्रतिष्ठित स्टैंडफोर्ड युनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप भी मिली थी. लेकिन वो इंजीनियरिंग का कोर्स पूरा करते उससे पहले ही सुशांत सिंह राजपूत का सपना बदल गया और उन्होंने एक्टिंग में भविष्य तलाशने का फैसला किया.

सुशांत सिंह राजपूत को किताबें पढ़ने का शौक था और अंतरिक्ष विज्ञान में उनकी बहुत गहरी रुचि थी. फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे बहुत कम अभिनेता होते हैं जो ऐसे विषयों पर भी अपनी पकड़ रखते हैं.

अब आप सोचिए कि कितने लोग होते हैं, जो अपनी फील्ड को छोड़कर उस दूसरी फील्ड में करियर बनाने के बारे में सोचते हैं जिसमें संघर्ष ही संघर्ष होता है. आज बहुत सारे लोग ये कह रहे हैं कि सुशांत में इच्छा शक्ति की कमी थी, लेकिन इच्छा शक्ति की कमी होती तो सुशांत इंजीनियरिंग छोड़कर एक्टिंग के फील्ड में नहीं आते. इंजीनियर बनकर एक सुरक्षित नौकरी करने के बजाय सुशांत ने संघर्ष का रास्ता चुना. ऐसा वही इंसान कर सकता है, जिसे खुद की काबिलियत पर विश्वास हो. एक्टर बनने के लिए सुशांत ने खूब मेहनत की. इसी मेहनत के बल पर उन्होंने पहले टीवी में नाम कमाया. 2008 से 2011 तक सुशांत कई टीवी सीरियल्स का चर्चित चेहरा रहे. ज़ी टीवी पर आने वाले धारावाहिक पवित्र रिश्ता से सुशांत देश के घर-घर में लोकप्रिय हुए. इसी प्रतिभा और इसी पहचान से सुशांत को फिल्मों मे काम मिला और इसके बाद सुशांत का कद बड़े-बड़े फिल्म स्टार्स के बराबर हो गया.

लेकिन कहा जा रहा है कि पिछले कुछ समय से वो डिप्रेशन से पीड़ित थे और शायद वो चकाचौंध भरी इस दुनिया में अकेला महसूस कर रहे थे. ऐसा होता है. बड़ी सफलताओं के बावजूद कई बार कुछ लोग खुद को अकेला महसूस करते हैं. ऐसा तब होता है जब हम भीतर से बाहर की ओर देखते हैं, बाहर की दौड़ हमें परेशान करती है और दौड़ में पीछे छूट जाने का डर हमें अकेला कर देता है. इसके विपरीत जब आप बाहर से अंदर की ओर देखते हैं तो आपको एकांत का अनुभव होता है और ये एकांत आपके विचलित मन को शांत करने का काम करता है.

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या हमें याद दिलाती है दौलत और शोहरत इस बात की गारंटी नहीं हैं कि आपको डिप्रेशन नहीं हो सकता. जो उपलब्धियां सुशांत सिंह राजपूत ने बहुत कम समय में हासिल की थी वो आज भी देश के करोड़ों लोगों का सपना है. इन उपलब्धियों का जिक्र आते ही सुशांत के चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ जाया करती थी. लेकिन ना जाने ऐसी करोड़ों मुस्कुराहटों के पीछे कितना गम और कितने दुख छिपे होते हैं. लोग इसलिए मुस्कुराते हैं ताकि वो दूसरों को अच्छा महसूस करा पाएं. लेकिन इस मुस्कुराहट के पीछे कई बार एक घुटन भी होती है और यही घुटन कई बार ऐसे हादसों की वजह बन जाती है.

इसी घुटन को कम करने के लिए हमने आज से एक हैशटैग शुरू किया है. ये हैशटैग है #Untold Story. हम सबके जीवन में ऐसी कई कहानियां होती हैं जिन्हें सुनने वाला कोई नहीं होता और यही कहानियां धीरे-धीरे हमें एक ऐसे किरदार में बदल देती हैं जिसका जीवन दूसरों के लिए तो लाइट कैमरा और एक्शन वाला होता है. लेकिन पैकअप हो जाने के बाद का जीवन किसी को दिखाई नहीं देता. इसलिए अगर आपकी भी कोई ऐसी अनसुनी कहानी है जिसे सुनाकर आप अपने मन का बोझ हल्का कर सकते हैं तो आप इस हैशटैग पर ट्वीट करके अपने मन की बात अपनी Untold Story हम तक पहुंचा सकते हैं.

फिल्मों में सुशांत को जो भी अवसर मिले हैं, वो किसी गॉड फादर की वजह से नहीं, बल्कि उनके टैलेंट की वजह से मिले हैं. सुशांत का फिल्मी करियर भले ही 7 वर्ष का रहा, लेकिन उन्होंने जिस तरह के किरदार निभाए उस पर जो मेहनत की वो सबको पर्दे पर भी दिखी. इसमें खासतौर पर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर फिल्म को देखकर कोई भी ये अंदाजा लगा सकता था कि सुशांत अपने काम को लेकर कितने गंभीर थे. अब आप सोचिए कि जो व्यक्ति इतना प्रतिभाशाली था, जो व्यक्ति इतना कामयाब था, ऐसे व्यक्ति ने आत्महत्या जैसा कदम क्यों उठा लिया?

सुशांत सिंह राजपूत बिहार से थे. उनके पिता सरकारी अफसर रहे हैं. उनकी तीन बहनें हैं. उनके कई करीबी रिश्तेदार बड़े-बड़े पदों पर हैं. सवाल ये है कि एक अच्छे खासे संपन्न परिवार का लड़का, एक अच्छा खासा पढ़ा लिखा युवा, एक अच्छा खासा कामयाब इंसान, वो आखिर डिप्रेशन में क्यों चला गया, क्यों उसने आत्महत्या कर ली? सबसे बड़ी बात ये कि पिछले वर्ष सुशांत की फिल्म छिछोरे आई थी, और इस फिल्म का संदेश ही आत्महत्या के विरुद्ध था. वो क्या कारण थे कि सुशांत अपनी ही फिल्म के दर्शन को अपनी असल जिंदगी में समझ नहीं पाए? इन सवालों का जवाब किसी को नहीं मिल पा रहा है.

क्या सुशांत सिंह राजपूत को बचाया जा सकता था? इसका जवाब किसी के पास नहीं है. सच ये है कि सुशांत को कोई ना कोई बात अंदर ही अंदर खाए जा रही थी. किसी भी व्यक्ति का सोशल मीडिया अकाउंट उसका आइना होता है. दिसंबर के बाद से यानी छह महीने से उन्होंने ट्विटर पर कोई पोस्ट नहीं किया. दस दिन पहले इंस्टाग्राम पर उन्होंने अपनी मां के बारे में लिखा था. जिसमें उन्होंने आंसू, सपने और जीवन की बात की थी. सुशांत की मां का निधन तब हो गया था, जब वो 16 वर्ष के थे. सुशांत के मन में क्या चल रहा था, इन बातों से समझा जा सकता था. लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

फिल्म इंडस्ट्री के बारे में कहते हैं कि यहां कोई दोस्त नहीं होता. कई लोगों का कहना है कि सुशांत अकेले पड़ गए थे. सुशांत के बारे में ये बात काफी समय से पता थी कि उन्हें कोई समस्या है, इसके लक्षण भी दिख रहे थे लेकिन इन लक्षणों को देखने और समझने वाला कोई नहीं था. ऐसा लगता है कि सुशांत को जानने वाले, फिल्म इंडस्ट्री के अधिकतर लोग अचानक प्रोफेशनल हो गए. फिल्म इंडस्ट्री के लोग किसी के मरने के बाद तो उसके दोस्त के तौर पर खुद को दिखाते हैं और बड़ी-बड़ी बातें लिखते हैं लेकिन जब वो व्यक्ति जिंदा होता है, मुसीबत में होता है, तो ये सभी लोग प्रोफेशनल हो जाते हैं.

शायद लोगों का यही व्यवहार बड़ी वजह है कि हर खूबी होने के बावजूद सुशांत के लिए फिल्म इंडस्ट्री में धीरे-धीरे चीजें खराब होने लगी थीं. सुशांत को फिल्म इंडस्ट्री में काम तो मिल रहा था, लेकिन शायद फिल्म इंडस्ट्री के लोगों से दिल नहीं मिल पा रहा था. ये बात तो किसी से छुपी नहीं है कि सुशांत ने फिल्म इंडस्ट्री में जिन दिक्कतों का सामना किया उन दिक्कतों से हर उस व्यक्ति को गुजरना पड़ता है जो फिल्म इंडस्ट्री में बाहर से आता है. क्योंकि ये एक ऐसी इंडस्ट्री है, जिसमें आपको अच्छा काम तभी मिलता है जब आपकी पहचान आपके फिल्मी परिवार से हो. इसे आप फिल्मी दुनिया का परिवारवाद कह सकते हैं. राजनीति की तरह फिल्मी दुनिया में भी परिवारवाद ट्रेंड करता है.

जिनके नाम बड़े-बड़े फिल्मी खानदान से जुड़े होते हैं. उन्हें अच्छे ऑफर्स और कामयाबियां जल्द मिलने लगती हैं. और ये परिवारवाद कुछ लोगों के लिए सफलता का पासपोर्ट बन जाता है. जबकि जिन्हें आगे बढ़ाने वाला कोई नहीं होता और ऐसे लोगों का जीवन संघर्षों से भरा होता है. इन्हीं बातों का जिक्र आज फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने एक वीडियो में किया है.

कंगना ने कहा, ‘सुशांत की मौत ने हम सबको तोड़कर रख दिया है. मगर कुछ लोग इस बात में माहिर हैं कि कैसे इसके उलट बात कहनी है. वह कह रहे हैं कि जिनका दिमाग कमजोर होता है, वह डिप्रेशन में आते हैं और सुसाइड करते हैं.’

 

कंगना ने आगे कहा, ‘जो बंदा इंजीनियरिंग में टॉप करता है. रैंक होल्डर है. उसका दिमाग कैसे कमजोर हो सकता है. अगर उनकी कुछ अंतिम पोस्ट देखें तो वह लोगों से कह रहे हैं कि वह उनकी फिल्में देखें, नहीं तो उन्हें इस इंडस्ट्री से निकाल दिया जाएगा. उनका कोई गॉड फादर नहीं है. मैं चकित हूं कि क्या इस हादसे की कोई बुनियाद नहीं है. सुशांत को छह साल के करियर में काई पो चे जैसी फिल्म देने के बाद भी कोई सराहना और अवॉर्ड नहीं मिला.’

कंगना आगे कहती हैं, ‘छिछोरे जैसी फिल्म को कोई अवॉर्ड नहीं मिला. गली बॉय जैसी एक वाहियात फिल्म को कई अवॉर्ड मिलते हैं. हमें आपसे कुछ नहीं चाहिए, लेकिन हम जो काम करते हैं, कम से कम उसकी सराहना तो करिए. क्यों मुझ पर 6 केस लगाए गए. क्यों मेरी फिल्मों को फ्लॉप घोषित किया गया. लोग मुझे मैसेज करके बोलते हैं कि तुम्हारा बहुत मुश्किल समय है. कोई ऐसा-वैसा कदम मत उठाना. ऐसा क्यों कहते हैं मुझे, मेरे दिमाग में ऐसी बातें क्यों डालते हैं. यह सुसाइड नहीं यह प्लान्ड मर्डर था. सुशांत की गलती यही है कि वह उनकी बात मान गया कि तुम वर्थलेस हो, वो मान गया. उसने अपनी मां की नहीं सुनी. हमें यह चुनना है कि इतिहास कौन लिखेगा.’

सुशांत की आत्महत्या पर आज सभी दुख जता रहे हैं, लेकिन किसी के जिंदा रहते उसकी बुराईयां करना और गॉसिप करना, यही फिल्म इंडस्ट्री का चरित्र है. सुशांत की आत्महत्या से आहत अभिनेता सिकंदर खेर ने एक भावुक वीडियो के जरिए फिल्म इंडस्ट्री की ये सच्चाई भी बताई है और ऐसे लोगों को वायरस बताया है कि जो बिना किसी की मानसिक स्थिति को जाने उसके बारे में गॉसिप करते हैं.

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