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भारत और नेपाल के संबंधों में आया नया मोड़, 9 महीने बाद आज होगी बैठक…

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काठमांडू. भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद (India-Nepal Border Dispute) को लेकर संबंध काफी तल्ख हो गए थे. नेपाल ने चीन के प्रभाव में आकर भारत के साथ दशकों के अच्छे संबंधों को तिलांजलि दे दी थी. नेपाल ने भारत के सीमा में आने वाले क्षेत्र को अपने नए राजनीतिक नक्शे (Nepal New Political Map) में जगह दे दी थी. इससे एक विवाद खड़ा हो गया था. अब विवाद और बयानबाजी के बीच नौ महीने गुजर जाने के बाद नेपाल, भारत से बातचीत (Video Conferencing Between India-nepal) करने को तैयार हुआ है. दोनों देशों के बीच आज पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक करेंगे.

नेपाल में शुरू किए जा रहे मेगा प्रोजेक्ट्स की समीक्षा भारत करेगा

नेपाल-भारत के बीच होने वाली इस बैठक में भारत की ओर से नेपाल में शुरू होने वाले और चलाए जा रहे प्रोजेक्ट्स की समीक्षा होगी. हालांकि, दोनों देश सीमा विवाद समेत कुछ दूसरों मुद्दों पर भी बातचीत कर सकते हैं. नेपाल की तरफ से विदेश मंत्रालय के सचिव शंकर दास बैरागी शामिल होंगे. भारतीय दल की अगुआई नेपाल में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा करेंगे.

अरुण-तृतीय जलविद्युत परियोजना में आई तेजी
वहीं नेपाल के संखुवासभा जिले में जारी अरुण-तृतीय जलविद्युत परियोजना (Arun-III Hydroelectric Project) के निर्माण में भी तेजी आई है. दरअसल, पांच भारतीय बैंक और दो नेपाली बैंक 900 मेगावाट की मेगा बिजली परियोजना के निर्माण के लिए ऋण देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. फरवरी में, नबील बैंक, जो नेपाली पक्ष से परियोजना के लिए कर्ज देने वालों में से एक है, ने भारत के सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसने हिमालयी राष्ट्र के लिए सबसे बड़े विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का रिकॉर्ड स्थापित किया. अरुण- III नेपाल की सबसे बड़ी पनबिजली परियोजना है और इसे भारत की सहायता से बनाया जा रहा है.

राम और बुद्ध को लेकर ​दोनों ओर से की गई थी टिप्पणी

भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने कहा है कि भगवान राम और बुद्ध दोनों देशों को बांटते नहीं बल्कि एकजुट करते हैं. बीते दिनों नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा था कि भगवान राम नेपाल के हैं. वहीं, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के भगवान बुद्ध को भारत का कहे जाने पर नेपाली विदेश मंत्री ने आपत्ति जताई थी.

वर्ष 2016 में नेपाल के तब के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल उर्फ प्रचंड भारत आए थे. दोनों देशों ने आपसी विवाद सुलझाने और सहयोग बढ़ाने के लिए मैकेनिज्म तैयार किया था. 17 अगस्त को इसी मैकेनिज्म के तहत 8वीं बातचीत होगी.

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