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प्रयागराज -लॉकडाउन में गिरफ्तार केरल और पश्चिम बंगाल के 2 जमातियों को मिली जमानत…

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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान कोराना (COVID-19) की महामारी का संक्रमण फैलाने और मस्जिद के मुसाफिरखाने में ठहरने की जानकारी पुलिस से छिपाने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए केरल (Kerala) और पश्चिम बंगाल (west Bengal) के 2 जमातियों की जिला कोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली है. एडीजे वीर भद्र सिंह ने जमानत अर्जी पर जमातियों के वकील सैय्यद अहमद नसीम गुड्डू को सुनकर जमानत स्वीकार कर ली है. कोर्ट ने दोनों जमातियों केरल के अशरफ पी के और पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के शहजान अली को 2-2 जमानत और मुचलका दाखिल करने पर रिहा करने का आदेश दिया है.

21 अप्रैल को 16 विदेशियों समेत 30 जमाती हुए थे गिरफ्तार

गौरतलब है कि 21 अप्रैल को महबूबा पैलेस करेली से 16 विदेशियों समेत 30 जमातियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था. दोनों जमातियों के खिलाफ लॉक डाउन में प्रयागराज जिले में आने और शाहगंज थाना क्षेत्र के मरकज़ स्थित मुसाफिर खाने में बिना प्रशासन की अनुमति के ठहरने, कोविड ता संक्रमण फैलाने और वीज़ा के उल्लंघन के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था.

बहस के दौरान ये दी दलील
जमानत अर्जी पर बहस के दौरान आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि सभी विदेशियों सहित 30 जमातियों में कोई भी व्यक्ति कोरोना से संक्रमित नहीं था और न ही किसी के द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को संक्रमित किया गया. कई बार की जांच में सभी आरोपियों की रिपोर्ट निगेटिव आई और किसी के द्वारा भी वीज़ा के नियमों का कोई उल्लंघन भी नहीं किया गया.

अनुवादक हैं दोनों आरोपी

कोर्ट को बताया गया कि विदेशी जमातियों द्वारा भारत सरकार की ऑफिशियल वेबसाइड पर फॉर्म ‘सी’ अपलोड किया गया था. पुलिस व एलआईयू को भी जानकारी दी गयी थी कि किसी भी आरोपी द्वारा कोई अपराध नहीं किया गया है. दोनों आरोपी अशरफ पी के और शहजान अली अनुवादक हैं. विदेशियों की भाषा का अनुवाद करना और उनको गाइड करना ही उनका काम है और उनके विरुद्ध लगाई गई धारा 188, 269, 270, 271 आईपीसी, 3 महामारी अधिनियम तथा 14 बी, 14सी विदेशी विषयक अधिनियम का अपराध नहीं बनता है.

जमातियों के जेल जाने के समय से ज़्यादातर समय अदालत बन्द होने के चलते उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकी. यहां तक कि 21 अप्रैल को जेल भेजे जाने के बाद से आज तक उनका वारन्ट भी नहीं बदला जा सका था

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